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हिन्दुस्तान अर्थात "हिन्दुओं की भूमि" भारतीय इतिहास में हिन्दू धर्म

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हिन्दू धर्म   भारत  का सबसे बड़ा और मूल धार्मिक समूह है और भारत की (79.8%≈80%) जनसंख्या (96.8 करोड़) इस धर्म की अनुयाई है। [2] भारत में  वैदिक संस्कृति  का उद्गम २००० से १५००  ईसा पूर्व  में हुआ था। [3]  जिसके फलस्वरूप हिन्दू धर्म को, वैदिक धर्म का क्रमानुयायी माना जाता है, जिसका भारतीय इतिहास पर गहन प्रभाव रहा है। स्वयं इण्डिया नाम भी  यूनानी  के  Ἰνδία  (इण्डस) से निकला है, जो स्वयं भी प्राचीन फ़ारसी शब्द हिन्दू से निकला, जो  संस्कृत  से सिन्धु से निकला । भारत का एक अन्य प्रचलित नाम  हिन्दुस्तान  है, अर्थात "हिन्दुओं की भूमि"। इतिहास  हिन्दू धर्म  लगभग 5000 साल से व्यवस्थित विकसित हुआ है और सात चरणों के रूप में देखा जा सकता है कि दूरबीन एक-दूसरे में है। कुछ हिंदुत्व के अधिवक्ताओं का मानना होगा कि 12,000 साल पहले हिमयुग के अंत तक  हिंदू धर्म  को अपने संपूर्ण रूप में ऋषियों के लिए प्रकट किया गया था। हिंदुत्व के इतिहास में, पौराणिक कथाएं सिर्फ समय-समय पर इतिहास है, इतिहासकार ग...

भारतीय इतिहास के ऐसे कई रहस्य हैं जिसे जान कर आप अचंम्भीत हो जायेंगे

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भारतीय इतिहास के ऐसे कई  रहस्य  अभी उजागर होना बाकी हैं, जो इतिहास में नहीं पढ़ाए जाते या कि जिनके बारे में  इतिहासकारों में मतभेद हैं । दरअसल, भारत के इतिहास को फिर से लिखे जाने की आवश्यकता है, क्योंकि वर्तमान में पाठ्यपुस्तकों में जो इतिहास पढ़ाया जाता है वह या तो अधूरा है या वह सत्य से बहुत दूर है।  भारतीय इतिहास की शुरुआत को सिंधु घाटी की सभ्यता या फिर बौद्धकाल से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। कुछ इतिहासकार इसे सिकंदर के भारत आगमन से जोड़कर देखते हैं। आज जिसे हम भारतीय इतिहास का प्राचीनकाल कहते हैं, दरअसल वह मध्यकाल था और जिसे मध्यकाल कहते हैं वह राजपूत काल है। तब  प्राचीन भारत  के इतिहास को जानना जरूरी है।  यदि हम मेहरगढ़ संस्कृति और सभ्यता की बात करें तो वह लगभग 7000 से 3300 ईसा पूर्व अस्तित्व में थी जबकि सिंधु घाटी सभ्यता 3300 से 1700 ईसा पूर्व अस्तित्व में थी। प्राचीन भारत के इतिहास की शुरुआत 1200 ईसापूर्व से 240 ईसा पूर्व के बीच नहीं हुई थी। यदि हम धार्मिक इतिहास के लाखों वर्ष प्राचीन इतिहास को न भी मानें तो संस्कृ‍त और कई प्राचीन ...

महाभारत की संक्षिप्त कथा ( कुरुवंश की उत्पत्ति और पाण्डु का राज्य अभिषेक से यदुकुल का संहार और पाण्डवों का महाप्रस्थान तक

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कुरुवंश की उत्पत्ति और पाण्डु का राज्य अभिषेक संपादित करें   कुरुक्षेत्र में कृष्ण और अर्जुन आलोक  मिश्रा पुराणों  के अनुसार  ब्रह्मा  जी से  अत्रि , अत्रि से  चन्द्रमा , चन्द्रमा से  बुध  और बुध से  इला-नन्दन   पुरूरवा  का जन्म हुआ। उनसे आयु,  आयु  से राजा  नहुष  और नहुष से  ययाति  उत्पन्न हुए। ययाति से  पुरू  हुए। पूरू के वंश में  भरत  और भरत के कुल में राजा  कुरु  हुए। कुरु के वंश में  शान्तनु  हुए। शान्तनु से गंगानन्दन  भीष्म  उत्पन्न हुए। शान्तनु से  सत्यवती  के गर्भ से  चित्रांगद  और  विचित्रवीर्य  उत्पन्न हुए थे। चित्रांगद नाम वाले  गन्धर्व  के द्वारा मारे गये और राजा  विचित्रवीर्य   राजयक्ष्मा  से ग्रस्त हो स्वर्गवासी हो गये। तब  सत्यवती  की आज्ञा से  व्यासजी  ने  नियोग  के द्वारा  अम्बिका  के गर्भ से  धृतराष्ट्र  और  अ...