भगवान शिव और देवी पार्वती के पुत्र गणेश जी की पूजा सभी भगवानों से पहले की जाती है| प्रत्येक शुभ कार्य करने से पहले इन्हे ही पूजा जाता है| गणेश जी को गणपति के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यह गणों के देवता है और इनका वाहन एक मूषक होता है| ज्योतिषी विद्या में गणेश जी को केतु के देवता कहा गया है| गणेश जी के शरीर की रचना माता पार्वती द्वारा की गई थी| उस समय उनका मुख सामान्य था, बिल्कुल वैसा जैसा किसी मनुष्य का होता है| एक समय की बात है माता पार्वती ने गणेश को आदेश दिया कि उन्हें घर की पहरेदारी करनी होगी क्योंकि माता पार्वती स्नानघर जा रही थी| गणेश जी को आदेश मिला की जब तक पार्वती माता स्नान कर रही है घर के अंदर कोई न आए| तभी दरवाज़े पर भगवान शंकर आए और गणेश ने उन्हें अपने ही घर में प्रवेश करने से मना कर दिया, जिसके कारण शिव जी ने गणेश का सर धड़ से अलग कर दिया| गणेश को ऐसे देख माता पार्वती दुखी हो गई| तब शिव...
दर्द भरी है यह प्रेम दास्तां, मजनूं ने ली थीं आखिरी सांसें यहां की सीमा पर लैला की दर्द भरी दास्तां, राजस्थान की सीमा पर मजनूं ने ली थीं आखिरी सांसें Alok Mishra जयपुर। प्यार, इश्क, प्रेम और मोहब्बत ये ऐसे शब्द हैं जो जुबान पर आते ही मन रोमांचित हो जाता है। लेकिन इनके रास्ते सहज नहीं हैं। हर पग पर कांटे और आग के शोले हैं। या यूं कहें कि ये आग का दरिया और जिसे डूब कर पार करना है। दुनिया में ऐसी कई प्रेम कहानियां हैं, जिन्हें आपने भले ही न देखा हो, लेकिन उनकी दर्द भरी दास्तां जरूर सुनी होगी। ये ऐसे प्रेमी युगल थे, जिन्होंने अपनी मोहब्बत के लिए सब कुछ न्यौछावर कर दिया। शायराना अंदाज ब्लाॅग्सपोट डाॅट काम आज आपको एक ऐसी प्रेमी युगल के बारे बताने जा रहा है। जिसकी दास्तान आज भी सुनी सुनाई जाती है। यह प्रेम कहानी आज भी अमर है। इस प्रेमी युगल को भारत का रोमियो जूलियट कहा जाता है। जी हां ये जोड़ा लैला-मजनूं है। अगली स्लाइड में पढ़े, इस प्रेमी युगल ने अपनी मोहब्बत के लिए क्या-क्या सहे जुल्म राजस्थान की सीमा पर मजनूं ने ली आखिरी सांस: राजस्थान के गंगानगर जिले में अनूपगढ़ से 11 किमी ...
कोई लाखों वर्ष, तो कोई हजारों वर्ष पुराना मानता है हिन्दू धर्म को। लेकिन क्या यह सच है? आओ हम कुछ महापुरुषों की जन्म तिथियों के आधार पर जानते हैं कि कितना पुराना है हिन्दू धर्म? हिन्दू धर्म की पुन: शुरुआत वराह कल्प से होती है। इससे पहले पद्म कल्प, ब्रह्म कल्प, हिरण्य गर्भ कल्प और महत कल्प बीत चुके हैं सम्राट विक्रमादित्य : 2,100 साल पहले हिन्दू धर्म विक्रमादित्य के पिता गंधर्वसेन और बड़े भाई भर्तृहरि थे। कलिकाल के 3,000 वर्ष बीत जाने पर 101 ईसा पूर्व सम्राट विक्रमादित्य का जन्म हुआ। उनके काल में हिन्दू धर्म ने महान ऊंचाइयों को प्राप्त किया था। वे एक ऐतिहासिक पुरुष थे। आचार्य चाणक्य : 2,300 साल पहले हिन्दू धर्म चाणक्य का जन्म ईस्वी पूर्व 371 में हुआ था जबकि उनकी मृत्यु ईस्वी पूर्व 283 में हुई थी। चाणक्य का उल्लेख मुद्राराक्षस, बृहत्कथाकोश, वायुपुराण, मत्स्यपुराण, विष्णुपुराण, बौद्ध ग्रंथ महावंश, जैन पुराण आदि में मिलता है। चाणक्य के समय ही भारत पर सिकंदर का आक्रमण हुआ था। भगवान महावीर स्वामी : 2,650 वर्ष पहले हिन्दू धर्म जैन धर्म के पुनर्संस्थापक महावीर स्वाम...
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